महेन्द्र सिंह धोनी को विश्व क्रिकेट के सबसे शांत और चतुर खिलाड़ियों में से एक माना जाता है. मुकाबला चाहे जितना भी कठिन हो धोनी शांत होकर उसका हल ढूंढने की कोशिश करते हैं. फिर चाहे वो बल्लेबाजी हो या विकेट के पीछे धोनी हर जगह दिमाग से काम लेते हैं और परिणाम अपनी ओर मोड़ लेते हैं. लेकिन कभी-कभी ऐसा भी होता है जब सबकुछ धोनी के कंट्रोल में नहीं होता, जैसे जैसे मैदान पर रणनीति धोनी के कैद से बाहर होते जाती है धोनी का पारा चढ़ता जाता है और अंत में धोनी अपना आपा खो बैठते हैं.
धोनी क्यू अपना आपा खो रहे है?
महेन्द्र सिंह धोनी को विश्व क्रिकेट के सबसे शांत और चतुर खिलाड़ियों में से एक माना जाता है. मुकाबला चाहे जितना भी कठिन हो धोनी शांत होकर उसका हल ढूंढने की कोशिश करते हैं. फिर चाहे वो बल्लेबाजी हो या विकेट के पीछे धोनी हर जगह दिमाग से काम लेते हैं और परिणाम अपनी ओर मोड़ लेते हैं. लेकिन कभी-कभी ऐसा भी होता है जब सबकुछ धोनी के कंट्रोल में नहीं होता, जैसे जैसे मैदान पर रणनीति धोनी के कैद से बाहर होते जाती है धोनी का पारा चढ़ता जाता है और अंत में धोनी अपना आपा खो बैठते हैं.
भगवान शिव को काशी छोड़ना पड़ा
कथाओ मैं
कहा
शिव के वाराणसी छोड़ने के पीछे एक सुन्दर कथा है। शिव को कुछ राजनीतिक कारणों की वजह से काशी छोड़ना पड़ा। हां, यह सच है। देवोदास नाम का एक राजा था। वह एक बहुत ही प्रभावशाली राजा था।
देवताओं को डर था कि अगर वाराणसी का ठीक से ध्यान नहीं रखा गया, तो उसकी ऊर्जा नष्ट हो जाएगी। इसलिए उन्होंने देवोदास से काशी का राजा बनने को कहा। लेकिन देवोदास ने एक शर्त रख दी – ‘मैं राजा तभी बनूँगा, जब शिव काशी छोड़ कर चले जाएं। अगर शिव यहीं रहते हैं, तो मेरे राजा बनने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि लोग शिव के ही पास जाएंगे। और मैं यहां महल में बैठा रहूंगा – यह किस तरह का राजा हुआ? शिव को तो काशी से जाना ही होगा।’ इस पर शिव पार्वती के साथ मंदार पर्वत पर रहने चले गए। वे वहां गए, लेकिन वहां रह नहीं पाए, वे काशी वापस आना चाहते थे, लेकिन यह राजनीतिक शर्त थी कि वे काशी वापस नहीं आ सकते थे। इसलिए उन्होंने कहा, ‘इस दिवोदास को बाहर निकालो, मैं वहां वापस जाना चाहता हूं।’ इसलिए उन्होंने 64 योगिनियों को वहां भेजा और कहा, ‘किसी तरह उस राजा को पथभ्रष्ट करो।’ एक बार हमें उसमें कोई खोट मिल गयी तो फिर हम उसे अपना बोरिया बिस्तर समेट कर वहां से जाने के लिए कह सकते हैं। और फिर मैं वापस आ जाऊंगा।’ योगिनियां आईं और काशी के समाज में पूरी तरह से फैल गईं। वे समाज को भ्रष्ट करना चाहती थीं, लेकिन उन्हें वह जगह इतनी भा गई, कि वे अपना मकसद ही भूल गयीं और वहां से वापस नहीं गईं। उसके बाद शिव ने सूर्य देव को भेजा। सूर्य को भी वह जगह ऐसी पसंद आई कि वह भी वापस नहीं गए। काशी के सभी सूर्य या आदित्य मंदिर उन्हीं के लिए बने हैं।
उसके बाद शिव ने ब्रह्मा को भेजा। ब्रह्मा खुद आये और उन्हें भी वह जगह पसंद आ गयी, और वे वापस नहीं गए। तब शिव ने कहा – ‘मैं इनमें से किसी पर विश्वास नहीं कर सकता’ और फिर शिव ने अपने गणों को भेजा। वे शिव को कभी भूल नहीं सकते, क्योंकि वे शिव के अत्यंत प्रिय हैं। लेकिन उनको यह जगह इतनी पसंद आई कि उन्होंने बोला शिव को सिर्फ इसी जगह रहना चाहिए। उन्हें मंदार पर्वत पर नहीं रहना चाहिए। और फिर वे वाराणसी के द्वार-पाल बन गए। उन्होंने कहा – ‘वैसे भी शिव को तो यहां आना ही है, अब हम वापस जा कर क्या करेंगे।’
उसके बाद दिवोदास को मुक्ति का लालच दिया गया। उन्होंने कई तरह के लालच देकर देवोदास को भ्रष्ट करना चाहा, लेकिन वे उसे भ्रष्ट नहीं कर पाए। दिवोदास भ्रष्ट हो जाने वालों में से नहीं था। लेकिन मुक्ति का लालच दिए जाने पर वह मान गया। उसके बाद शिव वाराणसी वापस आ गए।
इसलिए, वाराणसी में अविमुक्तेश्वर नामक का एक मंदिर है। क्योंकि शिव ने वचन दिया था, ‘चाहे कुछ भी हो जाए, मैं वाराणसी छोड़कर नहीं जाऊंगा।’
कहा
शिव के वाराणसी छोड़ने के पीछे एक सुन्दर कथा है। शिव को कुछ राजनीतिक कारणों की वजह से काशी छोड़ना पड़ा। हां, यह सच है। देवोदास नाम का एक राजा था। वह एक बहुत ही प्रभावशाली राजा था।
देवताओं को डर था कि अगर वाराणसी का ठीक से ध्यान नहीं रखा गया, तो उसकी ऊर्जा नष्ट हो जाएगी। इसलिए उन्होंने देवोदास से काशी का राजा बनने को कहा। लेकिन देवोदास ने एक शर्त रख दी – ‘मैं राजा तभी बनूँगा, जब शिव काशी छोड़ कर चले जाएं। अगर शिव यहीं रहते हैं, तो मेरे राजा बनने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि लोग शिव के ही पास जाएंगे। और मैं यहां महल में बैठा रहूंगा – यह किस तरह का राजा हुआ? शिव को तो काशी से जाना ही होगा।’ इस पर शिव पार्वती के साथ मंदार पर्वत पर रहने चले गए। वे वहां गए, लेकिन वहां रह नहीं पाए, वे काशी वापस आना चाहते थे, लेकिन यह राजनीतिक शर्त थी कि वे काशी वापस नहीं आ सकते थे। इसलिए उन्होंने कहा, ‘इस दिवोदास को बाहर निकालो, मैं वहां वापस जाना चाहता हूं।’ इसलिए उन्होंने 64 योगिनियों को वहां भेजा और कहा, ‘किसी तरह उस राजा को पथभ्रष्ट करो।’ एक बार हमें उसमें कोई खोट मिल गयी तो फिर हम उसे अपना बोरिया बिस्तर समेट कर वहां से जाने के लिए कह सकते हैं। और फिर मैं वापस आ जाऊंगा।’ योगिनियां आईं और काशी के समाज में पूरी तरह से फैल गईं। वे समाज को भ्रष्ट करना चाहती थीं, लेकिन उन्हें वह जगह इतनी भा गई, कि वे अपना मकसद ही भूल गयीं और वहां से वापस नहीं गईं। उसके बाद शिव ने सूर्य देव को भेजा। सूर्य को भी वह जगह ऐसी पसंद आई कि वह भी वापस नहीं गए। काशी के सभी सूर्य या आदित्य मंदिर उन्हीं के लिए बने हैं।
उसके बाद शिव ने ब्रह्मा को भेजा। ब्रह्मा खुद आये और उन्हें भी वह जगह पसंद आ गयी, और वे वापस नहीं गए। तब शिव ने कहा – ‘मैं इनमें से किसी पर विश्वास नहीं कर सकता’ और फिर शिव ने अपने गणों को भेजा। वे शिव को कभी भूल नहीं सकते, क्योंकि वे शिव के अत्यंत प्रिय हैं। लेकिन उनको यह जगह इतनी पसंद आई कि उन्होंने बोला शिव को सिर्फ इसी जगह रहना चाहिए। उन्हें मंदार पर्वत पर नहीं रहना चाहिए। और फिर वे वाराणसी के द्वार-पाल बन गए। उन्होंने कहा – ‘वैसे भी शिव को तो यहां आना ही है, अब हम वापस जा कर क्या करेंगे।’
उसके बाद दिवोदास को मुक्ति का लालच दिया गया। उन्होंने कई तरह के लालच देकर देवोदास को भ्रष्ट करना चाहा, लेकिन वे उसे भ्रष्ट नहीं कर पाए। दिवोदास भ्रष्ट हो जाने वालों में से नहीं था। लेकिन मुक्ति का लालच दिए जाने पर वह मान गया। उसके बाद शिव वाराणसी वापस आ गए।
इसलिए, वाराणसी में अविमुक्तेश्वर नामक का एक मंदिर है। क्योंकि शिव ने वचन दिया था, ‘चाहे कुछ भी हो जाए, मैं वाराणसी छोड़कर नहीं जाऊंगा।’
कम मेहनत मे YouTube से पैसे कमाये....
दोस्तो आज हम बात कर रहे है कम मेहनत मे YouTube से पैसे कैसे कमाये आज कल लोग soacial media पर काफ़ी पैसे कमा रहे है यहा मे दो तरीके बताऊँगा youtube से पैसे कमाने के लिए आप मेहनत कर के अलग अलग topic पर विडियो बनाते है तो ज़रूर आप को लोग पसंद करेंगे जब लोग आप को पसंद करेंगे तब आप को view मिलेगी और आप पैसे कमा सकते है अगर आप काफ़ी मेहनत करते है तो आप youtube कैरियर भी बना सकते है और आप ऍक्टर की तरह popularty भी पा सकते है
बहुत से इंडिया मेय yutuber है जो पैसे के साथ नाम भी कमाया है उनमें से कुछ के नाम मेय आप को बता देता हूं जैसे carryminaty technical guriji bb ki vines ets
बहुत से youtuber है जो पैसे के साथ नाम भी कमाया है हा इसमें से जो ये पोस्त पढ़ रहे है उनमें से कुछ मेहनत कर के कमाना चाहता है कुछ कम मेहनत कर के चलिए मेय दोनों तरीके बता देता हूं अगर आप मेहनत कर के पैसे कमाना चाहते है साथ में नाम भी और आप को समझ मेय नही आ रहा है की youtube पर क्या video बनाऊँ तो मेय आप को कुछ टॉपिक बता दत हूँ
1) technical field मेय आप को knowlage है तो एस पर आप बना सकते है
1) top 10 हा दोस्तों अगर आप कोई भी टॉप 10 का विडियो बना कर अच्छी view और पैसे कमा सकते है
3) camparision यह पर भी कोई दो देश का किसी भी चीज़ को लेकर camparision कर के video बना सकते है
4) biogeography आप किसी स्टार् या नेता जो फेमस हो उसका biogeography बना सकते हो etc
अगर आप कम मेहनत कर के पैसे कमाना चाहते हो तो आप songs या movie review dena सुरु कर दे यह बहुत से लोग रिव्यू दे रहे है और अच्छी खासी पैसे बना रहे है और अधिक जानकारी चाहिए तो नीचे आप comment box मेय कॉमेंट कर सकते है
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IND vs SA: साउथ अफ्रीका ने भारत को 6 विकेट से हराया, सीरीज में 1-1 की बराबरी
सेंचुरियन
साउथ अफ्रीका ने हेनरिक क्लासेन (69) और कप्तान जेपी ड्यूमिनी (64*) की शानदार बैटिंग की बदौलत भारत को दूसरे टी20 मैच में 6 विकेट से मात दी। अब दोनों टीमें 3 टी20 मैचों की इस सीरीज में 1-1 से बराबर हैं और सीरीज का तीसरा और अंतिम मैच शनिवार को केप टाउन में खेला जाएगा। इससे पहले भारत ने मनीष पांडे (79*) और महेंद्र सिंह धोनी (52*) की बदौलत मेजबान टीम के सामने 189 रन का लक्ष्य रखा था। मेजबान टीम ने 8 बॉल शेष रहते यह लक्ष्य हासिल कर लिया। क्लासेन को उनके शानदार खेल के लिए मैन ऑफ द मैच का खिताब दिया गया।
IND vs SA: देखें इस मैच का स्कोरकार्ड
189 रन का लक्ष्य लेकर उतरी साउथ अफ्रीका की शुरुआत भी कुछ खास नहीं रही थी और उसके दोनों ओपनर्स 38 रन तक पविलियन लौट चुके थे। यहां से कप्तान जेपी ड्यूमिनी और विकेटकीपर बल्लेबाज हेनरिक क्लासेन ने मोर्चा संभाला और साउथ अफ्रीका की पारी को जीत की राह पर ला दिया। क्लासेन (69) ने अपने टी20 करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेलते हुए शानदार फिफ्टी जमाई। उन्होंने 30 बॉल की अपनी पारी में 7 छक्के और 3 चौके जमाए। दूसरे छोर पर कप्तान जेपी ड्यूमिनी इस खिलाड़ी के साथ क्रीज पर डटे रहे। जब क्लासेन आउट हुए तो ड्यूमिनी (64*) ने मोर्चा अपने हाथ में ले लिया और फरहान बेहरदीन (16) के साथ मिलकर अपनी टीम को जीत दिला दी।
ड्यूमिनी ने 40 बॉल की अपनी शानदार कप्तानी पारी खेलते हुए 64 रन बनाए, जिसमें उन्होंने 4 चौके और 3 छक्के जड़े। ड्यूमिनी ने मैच से पहले ही अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे। उन्होंने कहा कि साउथ अफ्रीकी टीम इस मैच को सेमीफाइनल की तरह खेलेगी और अगला मैच उनके लिए और टीम इंडिया के लिए फाइनल होगा। ड्यूमिनी की टीम ने वैसा ही किया भी, जैसा उन्होंने टॉस के वक्त कहा था।
देखें: INDvsSA: दूसरा टी20 मैच का ब्लॉग
इस मैच में भारत एकमात्र स्पिन गेंदबाज युजवेंद्र चहल के साथ खेला था। चहल इस मैच में बिल्कुल बेअसर दिखे और क्लासेन के उनकी खूब धुनाई की। क्लासेन ने अपने ज्यादातर रन चहल की बॉल पर ही कूटे इसके बाद जेपी ड्यूमिनी भी उन्हें नहीं बक्शा। चहल ने 4 ओवर में कुल 64 रन लुटाए और इसके साथ टी20 इंटरनैशनल में वह सबसे ज्यादा रन लुटाने वाले पहले भारतीय बोलर बन गए। टी20 इंटरनैशनल में 4 ओवर में 64 रन लुटाने वाले चहल अब 4 अन्य बोलरों के साथ संयुक्त रूप से दुनिया के तीसरे गेंदबाज हैं।
इससे पहले भारत ने मेजबान साउथ अफ्रीका को इस मैच में 189 रन का लक्ष्य दिया था। भारत की ओर से मनीष पांडे (79*) और महेंद्र सिंह धोनी (52*) ने शानदार हाफ सेंचुरी जड़ी और इन दोनों की बदौलत निर्धारित 20 ओवर में 188 रन बनाए। टॉस हारकर पहले बैटिंग करने उतरी टीम इंडिया की शरुआत अच्छी नहीं रही और 45 रन जोड़ते-जोड़ते टीम इंडिया ने अपने तीन विकेट गंवा दिए थे। चौथे विकेट के लिए रैना (30) और मनीष पांडे ने 45 रन जोड़े और इसके बाद 5वें विकेट के लिए धोनी और पांडे ने अंतिम 9.2 ओवर में शानदार 98 रन की साझेदारी कर मेजबान टीम के सामने यह चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। साउथ अफ्रीका के लिए जूनियर डाला ने 2 और जेपी ड्यूमिनी और फेहलुकवायो ने 1-1 विकेट अपने नाम किया।
पढ़ें: T20: धोनी का धमाका, मनीष पांडे का बेस्ट स्कोर
इस मैच में मनीष पांडे ने अपने टी20 इंटरनैशनल करियर की दूसरी फिफ्टी जमाई और अपने टी20 करियर का सर्वाधिक स्कोर भी बनाया। 48 बॉल में 79 रन की पारी खेलने वाले पांडे ने अपनी इस पारी में 6 चौके और 3 चौके जड़े। इससे पहले पांडे का टी20 इंटरनैशनल में सर्वाधिक स्कोर 51 था, जो उन्होंने श्री लंका के खिलाफ बनाया था। इस मैच में 52 रन की पारी खेलने वाले एम. एस. धोनी ने भी अपने टी20 इंटरनैशनल करियर की दूसरी फिफ्टी जड़ी। अपनी 28 बॉल में 52 रन बनाने वाले धोनी ने इस पारी में 4 चौके और 3 छक्के जमाए।
मैच में पहले बैटिंग करने उतरी टीम इंडिया की शुरुआत अच्छी नहीं रही। रोहित शर्मा (1), शिखर धवन (24) और कैप्टन विराट कोहली (1) रन बनाकर पविलियन लौट गए। इस तरह भारत ने अपने पहले तीन विकेट 50 रन जोड़ने से पहले ही गंवा दिए। मैच के दूसरे ओवर की पहली ही गेंद पर रोहित शर्मा बगैर खाता खोले ही पविलियन लौट गए। जूनियर डाला ने रोहित को पहली ही बॉल पर LBW आउट कर दिया। इस समय भारत का स्कोर भी 0 ही था।
रोहित के आउट होने के बाद शिखर धवन ने सुरेश रैना के साथ मिलकर तेजी से रन जुटाने की कोशिश की। शिखर ने मैच में पहला ओवर मेडन फेंकने वाले क्रिस मॉरिस के दूसरे ओवर में जमकर रन लूटे। मॉरिस के इस ओवर में धवन ने 2 चौके और 2 छक्के जड़कर कुल 20 रन जुटाए। अगले ओवर में रैना ने डेन पीटरसन के एक ओवर में तीन चौके जड़े। अब धवन जोश में थे और उन्होंने ड्यूमिनी के अगले ओवर की भी पहली गेंद पर चौका जड़ा, लेकिन ड्यूमिनी की
साउथ अफ्रीका ने हेनरिक क्लासेन (69) और कप्तान जेपी ड्यूमिनी (64*) की शानदार बैटिंग की बदौलत भारत को दूसरे टी20 मैच में 6 विकेट से मात दी। अब दोनों टीमें 3 टी20 मैचों की इस सीरीज में 1-1 से बराबर हैं और सीरीज का तीसरा और अंतिम मैच शनिवार को केप टाउन में खेला जाएगा। इससे पहले भारत ने मनीष पांडे (79*) और महेंद्र सिंह धोनी (52*) की बदौलत मेजबान टीम के सामने 189 रन का लक्ष्य रखा था। मेजबान टीम ने 8 बॉल शेष रहते यह लक्ष्य हासिल कर लिया। क्लासेन को उनके शानदार खेल के लिए मैन ऑफ द मैच का खिताब दिया गया।
IND vs SA: देखें इस मैच का स्कोरकार्ड
189 रन का लक्ष्य लेकर उतरी साउथ अफ्रीका की शुरुआत भी कुछ खास नहीं रही थी और उसके दोनों ओपनर्स 38 रन तक पविलियन लौट चुके थे। यहां से कप्तान जेपी ड्यूमिनी और विकेटकीपर बल्लेबाज हेनरिक क्लासेन ने मोर्चा संभाला और साउथ अफ्रीका की पारी को जीत की राह पर ला दिया। क्लासेन (69) ने अपने टी20 करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेलते हुए शानदार फिफ्टी जमाई। उन्होंने 30 बॉल की अपनी पारी में 7 छक्के और 3 चौके जमाए। दूसरे छोर पर कप्तान जेपी ड्यूमिनी इस खिलाड़ी के साथ क्रीज पर डटे रहे। जब क्लासेन आउट हुए तो ड्यूमिनी (64*) ने मोर्चा अपने हाथ में ले लिया और फरहान बेहरदीन (16) के साथ मिलकर अपनी टीम को जीत दिला दी।
ड्यूमिनी ने 40 बॉल की अपनी शानदार कप्तानी पारी खेलते हुए 64 रन बनाए, जिसमें उन्होंने 4 चौके और 3 छक्के जड़े। ड्यूमिनी ने मैच से पहले ही अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे। उन्होंने कहा कि साउथ अफ्रीकी टीम इस मैच को सेमीफाइनल की तरह खेलेगी और अगला मैच उनके लिए और टीम इंडिया के लिए फाइनल होगा। ड्यूमिनी की टीम ने वैसा ही किया भी, जैसा उन्होंने टॉस के वक्त कहा था।
देखें: INDvsSA: दूसरा टी20 मैच का ब्लॉग
इस मैच में भारत एकमात्र स्पिन गेंदबाज युजवेंद्र चहल के साथ खेला था। चहल इस मैच में बिल्कुल बेअसर दिखे और क्लासेन के उनकी खूब धुनाई की। क्लासेन ने अपने ज्यादातर रन चहल की बॉल पर ही कूटे इसके बाद जेपी ड्यूमिनी भी उन्हें नहीं बक्शा। चहल ने 4 ओवर में कुल 64 रन लुटाए और इसके साथ टी20 इंटरनैशनल में वह सबसे ज्यादा रन लुटाने वाले पहले भारतीय बोलर बन गए। टी20 इंटरनैशनल में 4 ओवर में 64 रन लुटाने वाले चहल अब 4 अन्य बोलरों के साथ संयुक्त रूप से दुनिया के तीसरे गेंदबाज हैं।
इससे पहले भारत ने मेजबान साउथ अफ्रीका को इस मैच में 189 रन का लक्ष्य दिया था। भारत की ओर से मनीष पांडे (79*) और महेंद्र सिंह धोनी (52*) ने शानदार हाफ सेंचुरी जड़ी और इन दोनों की बदौलत निर्धारित 20 ओवर में 188 रन बनाए। टॉस हारकर पहले बैटिंग करने उतरी टीम इंडिया की शरुआत अच्छी नहीं रही और 45 रन जोड़ते-जोड़ते टीम इंडिया ने अपने तीन विकेट गंवा दिए थे। चौथे विकेट के लिए रैना (30) और मनीष पांडे ने 45 रन जोड़े और इसके बाद 5वें विकेट के लिए धोनी और पांडे ने अंतिम 9.2 ओवर में शानदार 98 रन की साझेदारी कर मेजबान टीम के सामने यह चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। साउथ अफ्रीका के लिए जूनियर डाला ने 2 और जेपी ड्यूमिनी और फेहलुकवायो ने 1-1 विकेट अपने नाम किया।
पढ़ें: T20: धोनी का धमाका, मनीष पांडे का बेस्ट स्कोर
इस मैच में मनीष पांडे ने अपने टी20 इंटरनैशनल करियर की दूसरी फिफ्टी जमाई और अपने टी20 करियर का सर्वाधिक स्कोर भी बनाया। 48 बॉल में 79 रन की पारी खेलने वाले पांडे ने अपनी इस पारी में 6 चौके और 3 चौके जड़े। इससे पहले पांडे का टी20 इंटरनैशनल में सर्वाधिक स्कोर 51 था, जो उन्होंने श्री लंका के खिलाफ बनाया था। इस मैच में 52 रन की पारी खेलने वाले एम. एस. धोनी ने भी अपने टी20 इंटरनैशनल करियर की दूसरी फिफ्टी जड़ी। अपनी 28 बॉल में 52 रन बनाने वाले धोनी ने इस पारी में 4 चौके और 3 छक्के जमाए।
मैच में पहले बैटिंग करने उतरी टीम इंडिया की शुरुआत अच्छी नहीं रही। रोहित शर्मा (1), शिखर धवन (24) और कैप्टन विराट कोहली (1) रन बनाकर पविलियन लौट गए। इस तरह भारत ने अपने पहले तीन विकेट 50 रन जोड़ने से पहले ही गंवा दिए। मैच के दूसरे ओवर की पहली ही गेंद पर रोहित शर्मा बगैर खाता खोले ही पविलियन लौट गए। जूनियर डाला ने रोहित को पहली ही बॉल पर LBW आउट कर दिया। इस समय भारत का स्कोर भी 0 ही था।
रोहित के आउट होने के बाद शिखर धवन ने सुरेश रैना के साथ मिलकर तेजी से रन जुटाने की कोशिश की। शिखर ने मैच में पहला ओवर मेडन फेंकने वाले क्रिस मॉरिस के दूसरे ओवर में जमकर रन लूटे। मॉरिस के इस ओवर में धवन ने 2 चौके और 2 छक्के जड़कर कुल 20 रन जुटाए। अगले ओवर में रैना ने डेन पीटरसन के एक ओवर में तीन चौके जड़े। अब धवन जोश में थे और उन्होंने ड्यूमिनी के अगले ओवर की भी पहली गेंद पर चौका जड़ा, लेकिन ड्यूमिनी की














